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रट्टू तोता और शिकारी का जाल | जंगल कहानी:- पुराने समय की बात है, भारत के एक विशाल जंगल 'नंदनवन' में पक्षियों का एक अनोखा स्कूल चलता था। इस स्कूल में जंगल के सभी छोटे-बड़े पक्षी पढ़ने आते थे। इस स्कूल के प्रधानाचार्य एक बहुत ही बुद्धिमान और बुजुर्ग उल्लू (Owl) थे, जिन्हें सब 'ज्ञान गुरु' कहकर बुलाते थे।
इसी जंगल में एक तोता रहता था, जिसका नाम था 'मिट्ठू'। मिट्ठू दिखने में बहुत सुंदर था - हरा रंग, लाल चोंच और गले में काली कंठी। लेकिन मिट्ठू में एक बहुत बड़ी कमी थी। वह चीजों को समझने की कोशिश नहीं करता था, बस उन्हें रट लेता था। उसे लगता था कि अगर उसे कोई बात याद है, तो वह सबसे होशियार है। इसलिए पूरा जंगल उसे प्यार से नहीं, बल्कि चिढ़ाने के लिए 'रट्टू तोता' कहता था।
ज्ञान गुरु का विशेष पाठ
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एक दिन, ज्ञान गुरु ने कक्षा में सभी पक्षियों को बुलाया। उन्होंने गंभीर आवाज़ में कहा, "बच्चों! जंगल में एक बहेलिया (शिकारी) घूम रहा है। वह पक्षियों को पकड़ने के लिए जाल बिछाता है और उस पर दाना डालता है। हमें उससे सावधान रहना होगा।"
ज्ञान गुरु ने पक्षियों को एक मंत्र (Rhyme) याद कराया ताकि वे सुरक्षित रहें: "शिकारी आएगा, जाल बिछाएगा,दाना डालेगा, लोभ से फंसना नहीं!"
सभी पक्षियों ने इसका अर्थ समझा। कबूतर ने पूछा, "गुरुजी, मतलब अगर हमें ज़मीन पर बहुत सारा दाना दिखे तो वहां नहीं जाना?" गुरुजी ने सिर हिलाया, "बिल्कुल सही!"
लेकिन मिट्ठू तोता अपनी आदत से मजबूर था। उसने गुरुजी की बात का मतलब समझने के बजाय, बस उस लाइन को रटना शुरू कर दिया। वह आँखें बंद करके जोर-जोर से बोलने लगा - "शिकारी आएगा, जाल बिछाएगा, दाना डालेगा, लोभ से फंसना नहीं... शिकारी आएगा..." उसे लगा कि बस यह लाइन याद कर लेने से वह सुरक्षित हो जाएगा।
परीक्षा की घड़ी
अगले दिन सुबह-सुबह, मिट्ठू तोता और उसके दोस्त भोजन की तलाश में निकले। मिट्ठू उड़ते-उड़ते भी वही रट रहा था - "शिकारी आएगा, जाल बिछाएगा..." उसके दोस्त, चिड़िया और कौआ, उसे समझाते रहे, "मिट्ठू, रटो मत, नीचे भी देखो।" लेकिन मिट्ठू तो अपनी धुन में था।
उड़ते-उड़ते उन्हें जंगल के एक खुले मैदान में ज़मीन पर ढेर सारे सुनहरे चावल के दाने बिखरे हुए दिखाई दिए। चिड़िया ने तुरंत चेतावनी दी, "रुको! देखो, वहां दाना है। गुरुजी ने क्या कहा था?" कौआ भी सतर्क हो गया, "हाँ, यह ज़रूर कोई चाल है। हमें नीचे नहीं उतरना चाहिए।"
लेकिन मिट्ठू तोता, जो अभी भी अपनी रटी हुई लाइन गा रहा था, उसने दाने देखे और उसका लालच जाग गया। उसके दिमाग ने काम करना बंद कर दिया क्योंकि उसने पाठ का मतलब तो समझा ही नहीं था। वह गाते-गाते ही नीचे उतरने लगा - "लोभ से फंसना नहीं... लोभ से फंसना नहीं..." और सीधे जाकर उन दानों पर बैठ गया।
जाल और पछतावा
जैसे ही मिट्ठू ने दाना चुगने के लिए चोंच नीचे की, खट्ट! की आवाज़ आई। वह एक मजबूत धागे के जाल में फंस गया था। यह बहेलिए का जाल था! मिट्ठू ने उड़ने की कोशिश की, लेकिन उसके पैर बुरी तरह उलझ गए थे।
हैरानी की बात यह थी कि जाल में फंसने के बाद भी मिट्ठू घबराहट में वही लाइन दोहरा रहा था - "शिकारी आएगा, जाल बिछाएगा, लोभ से फंसना नहीं!" पेड़ पर बैठे कौवे ने सिर पीट लिया। उसने कहा, "अरे मूर्ख रट्टू तोता! तुम यह बोल भी रहे हो और जाल में फंसे भी हुए हो। इसका मतलब है कि तुमने गुरुजी की बात सिर्फ जुबान से याद की, दिमाग से नहीं समझी।"
तभी झाड़ियों के पीछे से एक बहेलिया (Hunter) हाथ में थैला लेकर आता दिखाई दिया। उसे अपनी तरफ आता देख मिट्ठू की रटंत विद्या धरी की धरी रह गई। अब उसे असली डर का अहसास हुआ। वह समझ गया कि शब्दों को रटने से जान नहीं बचती, उनके अर्थ को समझने से बचती है।
दोस्तों की मदद और नई सीख
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बहेलिया पास आ ही रहा था कि कौवे और चिड़िया ने अपनी दोस्ती निभाई। कौवे ने काँव-काँव करके पूरे जंगल के पक्षियों को इकट्ठा कर लिया। हज़ारों पक्षी एक साथ बहेलिए के ऊपर झपट पड़े और उसे चोंच मार-मारकर भगा दिया।
मौका पाकर एक चूहे दोस्त ने आकर जाल काट दिया। मिट्ठू किसी तरह जान बचाकर उड़ गया। उस शाम, मिट्ठू ज्ञान गुरु के पास गया और माफी मांगी। "गुरुजी, मुझे माफ कर दें। मैंने पाठ रट लिया था, लेकिन उसे जीवन में उतारा नहीं। आज मुझे समझ आ गया है कि बिना समझे रटना (Rote Learning) सबसे बड़ी मूर्खता है।"
ज्ञान गुरु मुस्कुराए और बोले, "मिट्ठू, विद्या का अर्थ तोता बनना नहीं, बल्कि हंस बनना है जो दूध और पानी का फर्क समझ सके।"
उस दिन के बाद से मिट्ठू ने रटना छोड़ दिया और हर बात को गहराई से समझना शुरू किया। अब जंगल के जानवर उसे 'रट्टू तोता' नहीं, बल्कि 'समझदार मिट्ठू' कहने लगे।
बच्चों, यह जंगल की कहानी (Jungle Story) हमें बताती है कि स्कूल में हम जो भी पढ़ते हैं, उसका मतलब समझना चाहिए, ताकि मुसीबत के समय वह ज्ञान हमारे काम आ सके।
इस कहानी से सीख (Moral of the Story):
समझना रटने से बेहतर है: किसी भी बात को सिर्फ याद न करें, उसका अर्थ और उपयोग समझें।
ज्ञान का प्रयोग: असली ज्ञान वह है जो सही समय पर काम आए।
दोस्ती: सच्चे दोस्त मुसीबत में हमेशा साथ देते हैं।
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